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आपकी वैदिक जन्म कुंडली

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जन्म विवरण

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कुंडली (वैदिक जन्म कुंडली) क्या है?

कुंडली, जिसे जन्म कुंडली या वैदिक बर्थ चार्ट भी कहा जाता है, आपके जन्म के सटीक क्षण में आकाश की स्थिति का चार्ट है। इसमें सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थितियाँ राशियों और 12 भावों के अनुसार दिखाई जाती हैं। वैदिक ज्योतिष में इसका उपयोग व्यक्तित्व, जीवन पथ, करियर, रिश्तों, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विषयों की व्याख्या के लिए किया जाता है।

लग्न (Ascendant) क्या है?

लग्न वह राशि है जो आपके जन्म समय पर पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही होती है। यह वैदिक जन्म कुंडली का एक प्रमुख संदर्भ बिंदु है और पूरे 12 भावों की रूपरेखा तय करता है। वैदिक ज्योतिष में लग्न का उपयोग स्वभाव, रूप-रंग और जीवन के प्रति दृष्टिकोण जैसे गुणों की व्याख्या के लिए किया जाता है। जन्म समय में कुछ मिनटों का अंतर भी लग्न बदल सकता है, इसलिए कुंडली गणना के लिए सही जन्म समय बहुत महत्वपूर्ण है।

नक्षत्र क्या हैं?

नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में उपयोग होने वाले 27 चंद्र मंडल हैं। प्रत्येक नक्षत्र राशि चक्र के 13° 20' भाग में फैला होता है और उसका अपना देवता, प्रतीक और स्वामी ग्रह होता है। आपका जन्म नक्षत्र, जो चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होता है, आपकी राशि जानने में मदद करता है और कुंडली मिलान जैसी प्रणालियों में वर्ण, योनि, गण और नाड़ी जैसे गुणों के आकलन में उपयोग किया जाता है। यही वैदिक ज्योतिष में प्रयुक्त विंशोत्तरी दशा प्रणाली का भी आधार बनता है।

12 भाव एक नज़र में

भाव किन विषयों का प्रतिनिधित्व करता है
1stस्वयं, शरीर, व्यक्तित्व
2ndधन, परिवार, वाणी
3rdभाई-बहन, साहस, संचार
4thघर, माता, संपत्ति
5thसंतान, रचनात्मकता, शिक्षा
6thस्वास्थ्य, शत्रु, ऋण
7thविवाह, साझेदारी, व्यवसाय
8thदीर्घायु, परिवर्तन, गूढ़ विषय
9thभाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा
10thकरियर, प्रतिष्ठा, पिता
11thलाभ, मित्र, आकांक्षाएँ
12thहानि, आध्यात्मिकता, विदेश

अयनांश क्या है?

अयनांश ट्रॉपिकल राशि चक्र, जिसका उपयोग पश्चिमी ज्योतिष में होता है, और सिडेरियल राशि चक्र, जिसका उपयोग वैदिक ज्योतिष में होता है, के बीच का कोणीय अंतर है। विषुवों की पूर्वगति के कारण समय के साथ ये दोनों राशि चक्र अलग होते गए हैं। लाहिड़ी अयनांश भारत में सबसे अधिक प्रचलित प्रणाली है, जबकि रमन अयनांश एक अन्य प्रसिद्ध विकल्प है।

वैदिक ज्योतिष

ज्योतिष तत्व

वैदिक ज्योतिष में हर राशि चार प्राकृतिक तत्वों में से एक से जुड़ी होती है। प्रत्येक तत्व अपनी राशियों के मूल स्वभाव, प्रकृति और ऊर्जा को आकार देता है।

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तत्व

अग्नि

अग्नि तत्व की राशियों में मेष, सिंह और धनु शामिल हैं। इस तत्व से जुड़े लोग आमतौर पर ऊर्जावान, आत्मविश्वासी और काम में आगे बढ़कर पहल करने वाले होते हैं। इनमें जोश और नेतृत्व की भावना होती है। इनका साफ-साफ बोलने वाला स्वभाव इनकी ताकत है, हालांकि कभी-कभी ये जल्दबाजी भी कर सकते हैं।

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तत्व

पृथ्वी

पृथ्वी तत्व की राशियों में वृषभ, कन्या और मकर आते हैं। ये लोग अपने व्यावहारिक, भरोसेमंद और स्थिर स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। इन्हें सुरक्षा, मेहनत और ठोस परिणाम पसंद होते हैं। शुरुआत में ये थोड़े शांत लग सकते हैं, लेकिन भीतर से बहुत जिम्मेदार और वफादार होते हैं।

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तत्व

वायु

वायु तत्व की राशियों में मिथुन, तुला और कुंभ शामिल हैं। ये लोग सोचने-समझने वाले, जिज्ञासु और बातचीत में अच्छे होते हैं। इन्हें नए विचार, सीखना और लोगों से जुड़ना पसंद होता है। इन्हें बदलाव और स्वतंत्रता अच्छी लगती है, लेकिन कभी-कभी निर्णय लेने में समय लग सकता है।

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तत्व

जल

जल तत्व की राशियों में कर्क, वृश्चिक और मीन शामिल हैं। ये लोग संवेदनशील, भावुक और गहरी अंतर्दृष्टि वाले होते हैं। रिश्तों को ये बहुत महत्व देते हैं और बिना अधिक शब्दों के भी भावनाओं को समझ लेते हैं। इनकी करुणा इनकी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन कभी-कभी इन्हें अपनी भावनात्मक सीमाएं भी संभालनी पड़ती हैं।